शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010

दया करो प्रभु .

हे कृष्ण करुणासिंधो दीनबंधो जगत्पते |
गोपेश गोपिकाकान्त राधाकांत नमोस्तिते |

हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे

हे कृष्ण आप मुझे अपनी अहैतुकी भक्ति प्रदान करिए । नित्य आप ही का चिंतन हो , मनन हो , नमन हो |
हे मेरे नाथ मेरे ह्रदय मे आप अपने प्रेम की ज्योति प्रज्वलित कर दीजिये।
मै मूर्ख, अकिंचन नहीं जानता कि कैसे आपको स्मरण करू | मेरी समस्त इन्द्रिया तो सांसारिक भोगो मै लिप्त रहती है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, अहंकार मेरे सहचर है। भुक्ति पथ का राही भक्ति पथ पर कैसे चले।
हे मेरे प्रभु अब तो तुम्ही कुछ करो , कर्तापन होने पर भी इतना सामर्थ्य नहीं है कि भोगो से मुक्ति पा लू । ये तो आप ही को करना होगा । हे पार्थसारथी , मै तो किंकर्तव्यविमूढ़ हू , तुम्ही राह दिखाओ ।

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